अगर आप परेशान हैं, और आप आत्महत्या करना चाहते हैं, तो इस ब्लॉग को ज़रूर पढ़ें || How to avoid suicidal thoughts in Hindi

 

एक प्रोफेसर हमेशा कहा करते थे की "आपको एग्जाम पेपर ख़तम करने के लिए 3 घंटों का वक़्त दिया जाता है, मगर आप उसे दो या ढाई घंटे में ख़तम कर देते हैं। सोचो अगर आपने पेपर को जल्दी ख़तम कर दिया और आप एग्जामिनेशन हॉल से बाहर निकल रहे हैं, उतने में आपको याद आता है की आपका लिखा हुआ एक जवाब गलत है, या फिर उसे जवाब में कुछ टॉपिक मिसिंग है। अब आप हॉल से बाहर निकल चुके हो, आप अब कुछ नहीं कर सकते। अगर आप जल्दी न करते और आप पूरा टाइम लेते तो शायद उस गलत जवाब को सही करने का समय आपके पास था। इसी लिए कभी भी जल्दबाज़ी में अपना एग्जाम छोड़ कर न जाएँ। 

कुछ ऐसा ही हाल हमारी ज़िन्दगी का होता है, कई लोगों पर जब मुसीबत आती है या फिर किसी वजह से परेशान होते हैं , और इनको कोई सलूशन नहीं दीखता , तो वो इस ज़िन्दगी से मरना ज़्यादा पसंद करते हैं। हालाँकि इस क़दम से वो परेशानी या मुसीबत हल नहीं होती , बल्कि और बढ़ जाती है।  मगर वो अपनी इस परेशानी से छूट जाता है। उसे क़ुदरत ने पूरा समय दिया था मुसीबतों से लड़ने का , मगर उसने उन मुसीबतों से हार मान ली। 

अगर वो और थोड़ा समय लेता तो शायद उस परेशानी का हल निकाल लेता, ठीक उस एग्जामिनेशन की तरह अगर वह एग्जाम देने वाला थोड़ी देर और क्लासरूम में बैठा रहता तो वो उन सवालों के जवाब दे देता जो उसने छोड़ दिए थे। 

मगर इन दोनों एक्साम्प्लेस में एक अंतर है , अगर वो एग्जाम देने वाला लड़का फ़ैल हो जाता है फिर भी उसे दूसरा चांस मिलता है अपनी वो गलती सुधारने का और दूसरी बार एग्जाम देने का।  मगर जो आत्महत्या करता है , चाहे कारन कोई भी हो , उसे अब दूसरा मौका नहीं मिलता। 


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